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चन्दन (गीत)

Posted On: 19 May, 2015 Others,कविता में

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सांपों के बीच में चन्दन होगा,

सोना तपेगा तो कुन्दन होगा

आने वाले को जाना है, बन्धन होगा।।मुखड़ा।।

पुन्य और पापों का हिसाब देखा जायेगा,

क्या कमाया तूने अब तक तब परेखा आयेगा

सबसे दुःखी तब तेरा, मन होगा।।1।।

फिर क्यों माया मोह के चक्कर में प्राणी फूला,

लक्ष्मी के चक्कर में तू नारायण को भूला

जायेगा तब दूर तन, धन होगा।।2।।

अब तो प्राणी मान जा तू हरि से डोर लगा ले,

माया में सोयी तू अपनी आंखों को जगा ले

कितना सलौना तेरा, मन होगा।।3।।

ध्रुव प्रहलाद सुदामा से जोगी धरती पर आये,

महारथी सी करनी उनको याद किया जाये

हर दिन जलेगा जो, रावन होगा।।4।।

डा. अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी

वृन्दावन, मथुरा (उ.प्र.)

+919319261067



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
May 19, 2015

श्री अवधेश जी बहुत सुंदर कविता मन को चेतावनी देने वाली कविता भाव बहुत सुंदर डॉ शोभा

Madan Mohan saxena के द्वारा
May 19, 2015

सुन्दर प्रयास मन को छूटे शब्द

Maharathi के द्वारा
May 20, 2015

डा. शोभा भारद्वाज जीः मुझे जितनी आवश्यकता आपके द्वारा दिये गये प्रोत्साहन की है उससे अधिक आप जैसे अग्रणी लेखिका के द्वारा समालोचना की भी आवश्यकता है। मैं लगातार आपकी टिप्पणियां प्राप्त कर रहा हूं और गद् गद् हो रहा हूं। आपकी भूरि भूरि प्रषंसा करता हूं। कृपया स्वीकार करें। धन्यवाद।

Maharathi के द्वारा
May 20, 2015

श्रीमान सक्सैना साहब एक कबि को और क्या चाहिए। श्राताओं एवं पाठको से प्राप्त प्रेरणा ही उसकी धरोहर होती है। आपके द्वारा दिये गये प्रोत्साहन के लिए बारम्बार उर से धन्यवाद एवं आभार।

sadguruji के द्वारा
May 20, 2015

आदरणीय डा. अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी’ जी ! इस मंच पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है ! बहुत सुन्दर और प्रेरक रचना पढ़ने को मिली है ! मन आनंदित हो गया ! क्या खूब आपने लिखा है-फिर क्यों माया मोह के चक्कर में प्राणी फूला, लक्ष्मी के चक्कर में तू नारायण को भूला। जायेगा तब दूर तन, धन होगा।।2।। अब तो प्राणी मान जा तू हरि से डोर लगा ले, माया में सोयी तू अपनी आंखों को जगा ले। कितना सलौना तेरा, मन होगा।।3।। इसी भांति आप लिखते रहें ! बधाई और शुभकामनाओं सहित-सद्गुरुजी !

Maharathi के द्वारा
May 20, 2015

आदरणीय सद्गुरुजी ! अभिनन्दन के लिए आभारी रहूंगा। प्रोत्साहन प्राप्त कर रोमांचित हूं। आप जैसे विद्वानों द्वारा रचना पढने और उसकी सराहना करने के लिए धन्यवाद शब्द छोटा है समझ नहीं आ रहा क्या कहूं ? डा. अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी’ वृन्दावन, मथुरा । सम्पर्क सूत्र 09319261067


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