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प्रेम तपस्या (गीत)

Posted On: 20 May, 2015 Others,कविता,Others में

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गिरधारी गिरधारी जाना नहीं,

हमें छोड़ के, हमें छोड़ के ।

गिरधारी बनवारी, बांके बिहारी,

दुसह विरह नहीं बस के हमारी ।।मुखड़।।

क्रूर बने अक्रूर यूं मथुरा मत जाना,

आंसू भरा खजाना मत देते जाना ।

बिन प्रियतम जीवन तुमने कैसे जाना,

नख सिख विरहानल में हम को जल जाना ।

हूं प्यार में मैं बलिहारी शपथ तुम्हारी,

पापी वध है आवश्यकता प्रथम हमारी ।।

गिरधारी गिरधारी जाना नहीं,

हमें छोड़ के, हमें छोड़ के ।।1।।

गोपिन ने अश्रू धारा को धारा है,

जिससे हमने अपना जनम सुधारा है ।

कृष्णा प्राणन प्यारा प्राण अधारा है,

बन निर्मोही मथुरा आज सिधारा है ।

समुझावत हम सब हारी चली ना हमारी,

राधा रोको मोहन माने बात तुम्हारी ।।

गिरधारी गिरधारी जाना नहीं,

हमें छोड़ के, हमें छोड़ के ।।2।।

लाई है क्यों तुच्छ बात मन लाई है,

महारथी क्यों दुख क्यों आज रुलाई है ।

करदो अर्पण प्रेम जो जग की भलाई है,

प्रेम का ही तो दूजा नाम जुदाई है ।

हूं मैं भी प्रेम पुजारी प्रियतम मुरारी,

प्रेम तपस्या करना ही अब राह हमारी ।।

गिरधारी गिरधारी जाना नहीं,

हमें छोड़ के, हमें छोड़ के ।।3।।

डा. अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी

वृन्दावन, मथुरा (उ.प्र.)

+919319261067



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