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योग (कुण्डलियां)

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संत पतंजलि ने दिया प्रथम योग संदेश

योगेश्वर शिव ने दिये सार भरे उपदेश।

सार भरे उपदेश देश परदेशी आये

करे मंत्र अनुवाद देश अपने में गाये।

महारथी जग भरे ज्ञान फैलाकर अंजलि

हैं सार्थक संदेश दिये जो संत पतंजलि।।1।।


योगा ने चमका दिया अपना भारत देश

फिर से हम धारण करें वही गुरू का वेश।

वही गुरू का वेश ओम वैज्ञानिक धुन है

रोग नाश करता विशेष् ये इसका गुन है।

महारथी आरम्भ सूर्य को नमन से होगा

चमत्कार दिखलाएगा तब वैदिक योगा।।2।।


प्रतिरोधी प्रतिरोध का बड़ा मानसिक रोग

इसका भी उपचार है आओ कर लो योग।

आओ कर लो योग बात क्यों मन में आंसी

ठीक हो गयी दिल्ली के सी एम की खांसी।

महारथी तू धरम आढ में कौम विरोधी

राखि निरोगी कौम छोड़ बातें प्रतिरोधी।।3।।

डा. अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी

वृन्दावन, मथुरा (उ.प्र.)

+919319261067



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shakuntla mishra के द्वारा
June 13, 2015

प्रणाम महारथी जी ! कुण्डलियाँ -ये शायद लिखने की एक विधा है जो मुझे नहीं आती !आपकी कुण्डलियाँ मुझे बहुत अच्छी लगी !कई बार पढ़ी मैंने ! यहां धन्यवाद देना मुझे ठीक नहीं लग रहा अतः प्रणाम !!

Maharathi के द्वारा
June 13, 2015

माननीय शकुन्तला मिश्राजी जी सादर प्रणाम। प्रारम्भ में मुझे भी ऐसा ही लगता था कि कुण्डली लिखना महारथी के बस की बात नहीं है। क्योंकि पहले दोहा लिखो फिर रौला लिखो। आखिरी और पहले शब्द को मिलाओ। फिर मात्र छह पंक्तियों में अपनी पूरी बात रखो। ….. कठिन है। नहीं नहीं मैं घनाक्षरी लिख लूंगा। लेकिन धन्य हैं मेरे गुरुदेव श्री मोही जी। मुझे कुण्डली लेखन सिखाने में उन्होंने बहुत मेहनत की। एक ममता भरी माँ की भांति वे कई बार नाराज भी हुए और कई बार प्रशंसा भी की। उनका कहना था कि कठिन तो वो भी था जो रोटी का पहला गस्सा तुमने खाया था, और उसकी तुम्हें याद भी नहीं है। अभ्यास करते करते गस्सा खाना भी आ गया और कुण्डली लिखना भी। यहाँ यह लिखना आवश्यक है कि मैं आज भी कुण्डली लेखन सीख रहा हूँ। हालांकि आज यह मेरी मुख्य काव्य विधा है।। आपने मेरी कुण्डली की प्रशंसा कर मेरे गुरुदेव का मान बढाया है मैं आपका ऋणी हूँ।। साभार महारथी।।

Shobha के द्वारा
June 14, 2015

श्री अवधेशजी मैं कुछ समय के लिए बाहर गई थी इसलिए आपकी रचना पढ़ने से वंचित रही योग का प्रतिरोध करना कितना विचित्र लगता है ‘ प्रतिरोधी प्रतिरोध का बड़ा मानसिक रोग इसका भी उपचार है आओ कर लो योग।’ योग की बात मैं प्रतिरोध उचित ही नहीं है बहुत सुंदर विचार शोभा

Maharathi के द्वारा
June 15, 2015

डा. शोभा भारद्वाज जी सादर प्रणाम। मुझे आपकी लघु अनुपस्थिति भी खल रही थी। सौभाग्य कि आप पुनः हमारे साथ हैं। अभिनन्दन व स्वागत। महारथी।।

yamunapathak के द्वारा
June 19, 2015

महारथी जी योग के महत्व पर लिखीं सभी कुण्डलियाँ बहुत अच्छी हैं साभार

Maharathi के द्वारा
June 21, 2015

सुश्री यमुना पाठक जी सादर प्रणाम। कुण्डलियां पसन्द करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।। महारथी।।

rameshagarwal के द्वारा
June 21, 2015

जय श्री राम डॉ.अवधेश जी योग पर आपकी कविता पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.योग तो मनुष्य और आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है.गोटा में भगवन कृष्णाजी ने कहा की जो अपने कार्य बिना किसी फल की इच्छा के करते वे सच्चे कर्म योगी होते.योग से शरीर और मन स्वस्थ रह कर उर्जा देता है.कविता के लिए साधुवाद.

Maharathi के द्वारा
October 28, 2015

धन्यवाद।


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