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राष्ट्रीय पालतू पशु गाय

Posted On: 4 Oct, 2015 Others में

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राष्ट्रीय पालतू पशु गाय

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कब तक धर्म उन्माद का झेलूं दंष अरु शाप।

राष्ट्रिय पालतु पशु मुझे कर दो घोषित आप।।मुखड़ा।।

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दूध नहीं अमृत दिया, पले बढे सब लोग

श्वांस वायु की शक्ति से, दूर रहें सब रोग।।

दूध मूत्र गोबर सभी, पावनता की छाप।

राष्ट्रिय पालतु पशु मुझे, कर दो घोषित आप।।1।।

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होता है अन्याय नित, कहते मुझको मात

देवी ठोकर खा रही, हर दिन हर रात।।

ऐसी भीषण दुरदशा, बने तुम्हारा पाप।।

राष्ट्रिय पालतु पशु मुझे कर दो घोषित आप।।2।।

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उन्मादी बेदर्द हैं, खींच उतारें खाल।

इक दुखियारी फंस गयी, सम्प्रदाय के जाल।।

राजनीति छाती चढी, देती दो दो थाप।।

राष्ट्रिय पालतु पशु मुझे, कर दो घोषित आप।।3।।

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चीता हो वन पशु रहे, वो वन में स्वछंद।

पालतु पशु बन जाऊँ, गर हो प्रताड़ना बंद।।

महारथी स्थिर रहे, सम्प्रदाय का ताप।

राष्ट्रिय पालतु पशु मुझे, कर दो घोषित आप।।4।।

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कब तक धर्म उन्माद का, झेलूं दंष अरु शाप।

राष्ट्रिय पालतु पशु मुझे, कर दो घोषित आप।।

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Cow-II

Gau-Rakha

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
October 5, 2015

श्री महारथी जी बीच में आपके लेख पढ़ने को नहीं मिले गाय के महत्व पर आपने बहुत सुंदर पंक्तिया लिखी हैं उन्मादी बेदर्द हैं, खींच उतारें खाल। इक दुखियारी फंस गयी, सम्प्रदाय के जाल।। राजनीति छाती चढी, देती दो दो थाप।। राष्ट्रिय पालतु पशु मुझे, कर दो घोषित आप।।3।।यदि गऊ माता वोट बैंक का साधन बनतीं जरूर घोषित करते

Maharathi के द्वारा
October 28, 2015

लेखन कार्य जारी था लेकिन व्यस्तता के चलते आप तक पहुंचा नहीं पा रहा था। खेद है। स्मरित रखने के लिए आभार।


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