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तेरी जादूगरी (एक गजल)

Posted On: 10 Jan, 2016 Others में

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Gazalतेरी जादूगरी (एक गजल)
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तेरी जादूगरी का ये फल हो गया
एक था काफिया वो गजल हो गया।।मुखड़ा।।

आंख दायीं ने कीं हरकतें इस कदर
प्रश्न जेहन में था जो वो हल हो गया।।

जब से तुम हो मिले एक चाहत मिली
सबसे जीवन का रंगीं वो पल हो गया।।

गर्म सांसों की कारीगरी चल गयी
पैर के नीचे दलदल था थल हो गया।।

तेरे साये में बैठा खबर ना हुई
कल हुआ आज और आज कल हो गया।।

रात आई बिछुड़ने की यारा मेरे
नेत्र बायां तुम्हारा सजल हो गया।।

छलके अश्कों से मुझको विदा जो किया
एक पल को बिछड़ना भी छल हो गया।।

तेरे गेसू बने लौह जंजीर से
पल में फू महारथी का वो बल हो गया।।

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