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चिकनगुनिया

Posted On: 18 Feb, 2017 Hindi Sahitya में

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घसीटा भाई साहब के बड़े भाई का नाम भीकम भाई साहब है। उनके मुहल्ले में उनका घर काफी बड़ा है। सजावट भी अच्छी खासी है। उनका परिवार संयुक्त परिवार है जिसमें काफी सदस्य हैं। परिवार के सभी सदस्य आपस में मिलजुल कर रहते हैं और अलग अलग प्रकार का काम कुशलता पूर्वक करते हैं। इसीलिए गांव में इस परिवार की काफी इज्जत है और परिवार तरक्की के रास्ते पर तेजी से आगे बढ रहा है।

उनके मुहल्ले में ही रहता है पाली खान। उसका घर भीकम भाई साहब के घर से लगा हुआ है। हालांकि उसका मकान कोई खास बड़ा नहीं है, पुराने जमाने में उसके बाप दादा की करुण पुकार पर गांव के लोगों उनके लिए एक घर बनवा दिया था। आज भी उसी ढंग का बना है चारों से जर्जर हो चुका है। पिछली बार दीवारों पर रंग कब कराया गया था, मुझे क्या पाली खान को भी याद नहीं है।


पाली खान का छोटा भाई बंगी रहमान अपने बड़े भाई की हरकतों से परेशान था सो उसने पांच वर्ष पहले अपना अलग घर और कारोबार बना लिया था। बंगी रहमान को जब भी मदद की आवश्यकता पड़ती तो वह बेझिझक भीकम भाई साहब से मदद मांग लेता था और भीकम भाई साहब भी उसकी जी जान से मदद कर दिया करते थे। आज बंगी रहमान ने गांव में ठीक ठाक सा मुकाम बना रखा है। गांव के लोग उसकी तरक्की पर नाज करते हैं।


जहां तक पाली खान की मानसिकता का सवाल है। वह काफी नकारात्मक सोच रखता है। उसे इसी बात से चिढ रहती है कि भीकम भाई साहब बंगी रहमान की मदद क्यों करते हैं और इसीलिए वह भीकम भाई साहब के पूरे घर से जलता है।


गांव के लोगों, खासकर भीकम भाई साहब के परिवार को परेशान करने के उद्देश्य से उसने अपने घर में एक दो सदस्यों को मच्छरदानियों में मक्खी और मच्छर पालने पर लगा रखा है। जब भी मौका मिलता पालीथीन की थैली में मक्खी मच्छर भर कर भीकम भाई साहब के घर छोड़ आता है। इससे उनके घर के सदस्यों को कभी मलेरिया, तो कभी हैजा होता रहता है। कई बार गांव में भी मलेरिया और हैजा इसके द्वारा पाली गई मक्ख्यिों के कारण फैलता रहा है।


जब कभी भी भीकम भाई साहब के परिवार के सदस्यों ने मक्खी और मच्छरों को मारने की मुहिम चलायी तो पाली खान हर बार चारों ओर जीव-हत्या, जीव-हत्या का नारा बुलन्द करके भीकम भाई साहब के परिवार के सदस्यों की बुराई करता फिरता था।


खोज करने पर पता चल ही गया कि गांव में मलेरिया और हैजा जिन मक्खी और मच्छरों के कारण फैला करता है उन्हें पाली खान के द्वारा पाला जाता है। गांव के लोगों ने पाली खान से कहा कि मक्खी और मच्छर पालना बंद करे। लेकिन उसने स्वीकार ही नहीं किया कि ये मक्खी और मच्छर उसके यहां पाले जाते हैं। बात गांव प्रधान अमीन देव तक पंहुची।


अमीन देव ने उसे नसीहत दी कि मक्खी और मच्छर पालना बंद करे। लेकिन इस बार भी उसने अपने घर मक्खी और मच्छर पाले जाने से साफ इंकार कर दिया। अमीन देव अधिक कठोर रुख इसलिए नहीं अपना रहे थे, क्योंकि अगले चुनाव में उन्हें फिर वोटों की आवश्यकता थी। अक्सर अमीन देव और रूमान सिंह में नजदीकी चुनावी जंग होती थी। हालांकि दोनों ही पाली खान को चेतावनी देते रहते थे कि वह अपनी हरकतें बंद कर दे। लेकिन, दोनों को ही चुनाव की चिंता भी रहती थी। इसीलिए कोई भी कड़ाई से उससे मक्खी और मच्छर पालना बंद करने के लिए नहीं कहता था। पाली खान उनकी इसी कमजोरी का फायदा उठाता और घर में सफाई के नाम पर दोनों से हर महीने रुपये ऐंठ लेता। लेकिन पाली खान उन पैसौं का खर्चा अपने घर में सफाई पर कभी नहीं करता था बल्कि गुड़ खरीद लाता था जिस पर वह मक्खी और मच्छरों की पैदावारी करता था।


अब उसने भीकम भाई साहब के घर मक्खी और मच्छरों की खेपें बढ़ा दी। उसके पडोस में चन्दो का भी घर था। पिछली बार वह भी गांव प्रधान का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया। भीकम भाई साहब के परिवार ने इस बार अमीन देव का समर्थन किया था इसलिए वह भी भीकम भाई साहब के परिवार से खुन्नस मानने लग गया था। यही कारण था कि पाली खान को छुप छुप कर मदद करता था।


अमीनदेव और रूमान सिंह के पास पहले से ही रायफल हुआ करती थी। चुनाव में बराबरी दिखाने के लिए चन्दो ने भी रायफल खरीद ली। आये दिन चन्दो भीकम भाई साहब को रायफल की धौंस और धमकी दिया करता था। हालांकि भीकम भाई साहब अमन पसंद थे लेकिन मजबूरीवश न चाहते हुए भी उन्हें भी रायफल खरीदनी पड़ी। देखी देखा आवश्यकता न होने पर भी पाली खान ने अमीन देव से मिले पैसों से रायफल खरीद ली।


कुछ समय पहले पाली खान कहीं से चिकनगुनिया का मच्छर ले आया और उनकी पैदावारी करने लग गया। इस मच्छर को भी उसने भीकम भाई साहब के घर पहुंचाया लेकिन उसका मच्छर पकड़ में आ गया। जब उससे कहा गया कि “यह मच्छर उसने ही भेजा है, इसे भेजना बंद करे।“ तो वह भीकम भाई साहब को रायफल की धमकी दे आया। भीकम भाई साहब के परिवार के सदस्यों ने आपस में सलाह मशविरा करके रात में उसके घर में घुसकर उसकी एक मच्छरदानी में आग लगा दी और उसमें पल रहे मच्छरों को मार दिया।


अब पालीखान ने चारों ओर चर्चा और शिकायतें करना शुरू कर दिया कि भीकम भाई साहब ने मेरे घर में घुसकर मच्छरदानी जला दी है।


अमीन देव ने कहा-‘‘पाली खान! तुझसे मना किया था कि मच्छरदानियों कर धन्धा बंद कर दे तब तो तू नहीं माना था।’’


पालीखान ने सफाई दी कि ‘‘इन में मच्छर और मक्खी नहीं पाले जा रहे हैं।’’


‘‘तेरी मच्छरदानियों में पले मच्छरों ने मेरे घर में भी चिकनगुनिया फैलाया था।’’ इस बार अमीन देव का स्वर तल्ख था ‘‘झूठ ना बोल पाली खान पिछली साल मैंने भी तेरे घर में घुसकर छत पर लगी मच्छरदानी में कितना बड़ा मच्छर मारा था। तुझे भी दिखाया था। भूल गया क्या?’’


पाली खान सिर झुकाए सहमा सहमा सा सब सुन रहा था।


‘‘पालीखान! ध्यान से सुन’’-इस बार अमीन देव के स्वर में चेतावनी थी-‘‘इन मच्छरदानियों को समूल जला दे नहीं तो आज से तुझे सफाई के लिए दिये जाने वाले पैसे जिससे तू गुड़ खरीद कर मच्छर पालता है, बन्द कर दिये जायेंगे। पिछले महीने इन्हीं पैसों से तू रायफल भी खरीद कर लाया था।’’


पाली खान की ऐसी हैसियत नहीं थी कि वह अमीन देव से झगड़ा मोल ले। गांव के लोगों ने उसके घर आना जाना बंद कर रखा था कि कहीं मक्खी और मच्छर उनको डंक मार कर चिकनगुनिया न फैला दें। इसी लिए आज पाली खान का घर गांव का सबसे अधिक असुरक्षित घर माना जाता है।


इस दौरान मच्छरदानियां पुरानी भी हो चली थीं। इनमें से किसी एक मच्छर दानी में से कुछ मक्खी और मच्छर उस दिन बाहर निकल गये और पाली खान के छोटे नाती को ही डंक मार दिया। उसे चिकनगुनिया हो गया। दिनों दिन प्लेटलेट कम हो रही थीं। हालत खराब होती जा रही थी।


भीकम भाई साहब ने मानवता के नाते अपने घर से बकरी का दूध और पपीते के पत्ते पाली खान के घर भेज दिये ताकि बच्चा बच जाये। चन्दो को बुरा लग रहा था कि भीकम भाई साहब ने बकरी का दूध और पपीते के पत्ते क्यों भेजे हैं? चन्दो ने पाली खान पर दवाब डालकर भीकम भाई साहब के भेजे बकरी के दूध और पपीते के पत्तों को फेंकवा दिया। अन्ततः उसके नाती की मौत हो गयी।


गांव के लोगों ने पाली खान पर फिर से दवाब बनाया कि वह इन मक्खी और मच्छरों को पालना बंद करे। इस बार उसने गांव के लोगों के सामने ही करीब दस मच्छरों को मार भी दिया। किसी ने उसे जीव हत्या का ताना नहीं दिया।


अमीन देव, रूमान सिंह और भीकम भाई साहब ने उसे फिर समझाया कि “अभी तेरी मच्छरदानियों में बहुत से मक्खी और मच्छर हैं सभी को नष्ट कर दे। मच्छरदानियां बहुत पुरानी हो चली हैं वे इन में से निकल कर तेरे परिवार को खत्म कर देंगे। दूसरों के लिए गड्ढा न खोद। औरों के लिए जो गड्ढा खोदा जाता है वह गड्ढा उसी की कब्र बन जाता है। मकड़ी औरों के लिए जाला बुनती है लेकिन अंत में वह उसी में फंस कर मर जाती है।“


जैसे कूकरे की दुम कभी सीधी नहीं होती है उसी तरह पाली खान अब फिर पुराने ढर्रे पर आ गया है। मक्खी और मच्छरों को समूल नष्ट करने के स्थान पर चन्दो से मदद मांग रहा है ताकि नई मच्छरदानियां लगा सके और नये नये मक्खी और मच्छर पाल सके। गांव में, खासकर भीकम भाई साहब के घर, चिकनगुनिया फैला सके। इसी लिए आज पाली खान का घर गांव का सबसे अधिक असुरक्षित घर माना जाता है।


पता नहीं पाली खान को कब अक्ल आयेगी?


यह मेरी नयी कहानी है। इसे पढें और आनन्द लें। ध्यान रखें कि इस कहानी का सम्बन्ध पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से जोड़ें। (घटना, पात्र एवं स्थान आदि सभी काल्पनिक हैं यदि कोई समानता पायी जाती है तो वह महज एक संयोग है।)


डा. अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी’

129, टटिया स्थान रोड, राधा निवास प्रथम,

वृन्दावन-281121, मथुरा (उ.प्र.)

+919319261067



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