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...तो गज़ल बने

Posted On: 17 Jul, 2017 कविता में

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तुम जरा सामने आ जाओ, तो गज़ल बने।
रुख से नकाब को सरकाओ, तो गज़ल बने।।
हर अदा कातिल है मर गये हम दिल जानी।
साथ आओ और शरमाओ, तो गज़ल बने।।
दरिया ए प्यार वो आंखों में गहरा-गहरा।
इस दरिया में जो तैराओ, तो गज़ल बने।।
इक मयखाना लिये सामने हो होठों पर।
थोड़ा होठों से छलकाओ, तो गज़ल बने।।
काली जुल्फें हैं घटा या कि किसी सावन की।
प्यासे दिल पर जल बरसाओ, तो गज़ल बने।।
दर्दे तन्हाई तुम्हें देखकर काफूर हुआ।
दिल के संग दिल को धड़काओ, तो गज़ल बने।।
चाल ऐसी कि थिरकती हो कोई नव हिरनी।
हर कदम चाल पे बलखाओ, तो गज़ल बने।।
गज़ल ए प्यार अकेले नहीं गायी जाती।
महारथी को न तड़पाओ, तो गज़ल बने।।
तुम जरा सामने आ जाओ, तो गज़ल बने।
रुख से नकाब को सरकाओ, तो गज़ल बने।।



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