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नील गगन के ऊपर

Posted On: 17 Jul, 2017 कविता में

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नील गगन के ऊपर रहने वाले की
कविता का मैं नायक तुम हो नायिका।
नील गगन के ऊपर रहने वाले की,
छंदों का तू गायक मैं हूं गायिका।।
नयी सुहानी एक अल्‍पना नया-नया कण धूलि का,
नयी कहानी नयी कल्पना केनवास पर तूलिका।
नयी अल्‍पना रचते रहने वाले की,
रचना का तू सायक मैं हूं सायिका।।
नील गगन के ऊपर रहने वाले की,
छंदों का तू गायक मैं हूं गायिका।।
तेरा मेरा नाता रचकर लाया है आकाश ये,
इसीलिए है नाता अपना सब नातों से खास ये।
नयी कहानी लिखते रहने वाले की,
श्रुतिका को सुख दायक तुम सुख दायिका।।
नील गगन के ऊपर रहने वाले की,
कविता का मैं नायक तुम हो नायिका।।
कथा समंदर अथाह समन्दर गोते बाजी संग रे,
अंग-अंग में रंग भरा है नवजीवन नव ढंग रे।
नीले सागर में तैराने वाले की
तरणी का तू नाविक मैं हूं नाविका।।
नील गगन के ऊपर रहने वाले की,
छंदों का तू गायक मैं हूं गायिका।।
तरणी में हम तुम हैं चहुंदिश नीलकमल भरमार ये,
लहर-लहर अठखेली करता तेरा मेरा प्यार ये।
प्रेम गीत से भरी प्रेम की गीता का,
महारथी अधिनायक तुम अधिनायिका।।
नील गगन के ऊपर रहने वाले की,
कविता का मैं नायक तुम हो नायिका।।
नील गगन के ऊपर रहने वाले की,
छंदों का तू गायक मैं हूं गायिका।।
नील गगन के ऊपर रहने वाले की
कविता का मैं नायक तुम हो नायिका।

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