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Maharathi


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उजड़ गया यारों, ये वो चमन नहीं है

Posted On: 24 Jul, 2017  
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कविता में

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It is very dangerous.

Posted On: 24 Jul, 2017  
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में

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हो जाएगा खाक, बचे ना नाक न उंगली

Posted On: 22 Jul, 2017  
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कविता में

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तम्बाकू विरोध

Posted On: 20 Jul, 2017  
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कविता में

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नील गगन के ऊपर

Posted On: 17 Jul, 2017  
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कविता में

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…तो गज़ल बने

Posted On: 17 Jul, 2017  
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कविता में

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चिकनगुनिया

Posted On: 18 Feb, 2017  
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Hindi Sahitya में

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मेरा वैलेन्टाइन डे

Posted On: 16 Feb, 2017  
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में

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वृन्दावन की यातायात व्यवस्था

Posted On: 11 Jan, 2016  
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तेरी जादूगरी (एक गजल)

Posted On: 10 Jan, 2016  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Maharathi Maharathi

के द्वारा: Dr. D K Pandey Dr. D K Pandey

माननीय शकुन्तला मिश्राजी जी सादर प्रणाम। प्रारम्भ में मुझे भी ऐसा ही लगता था कि कुण्डली लिखना महारथी के बस की बात नहीं है। क्योंकि पहले दोहा लिखो फिर रौला लिखो। आखिरी और पहले शब्द को मिलाओ। फिर मात्र छह पंक्तियों में अपनी पूरी बात रखो। ..... कठिन है। नहीं नहीं मैं घनाक्षरी लिख लूंगा। लेकिन धन्य हैं मेरे गुरुदेव श्री मोही जी। मुझे कुण्डली लेखन सिखाने में उन्होंने बहुत मेहनत की। एक ममता भरी माँ की भांति वे कई बार नाराज भी हुए और कई बार प्रशंसा भी की। उनका कहना था कि कठिन तो वो भी था जो रोटी का पहला गस्सा तुमने खाया था, और उसकी तुम्हें याद भी नहीं है। अभ्यास करते करते गस्सा खाना भी आ गया और कुण्डली लिखना भी। यहाँ यह लिखना आवश्यक है कि मैं आज भी कुण्डली लेखन सीख रहा हूँ। हालांकि आज यह मेरी मुख्य काव्य विधा है।। आपने मेरी कुण्डली की प्रशंसा कर मेरे गुरुदेव का मान बढाया है मैं आपका ऋणी हूँ।। साभार महारथी।।

के द्वारा: Maharathi Maharathi

के द्वारा: meenakshi meenakshi

के द्वारा: maharathi maharathi




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