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Maharathi


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राधा तुम्हारी आकुल, होकर के लिखती पाती।

Posted On: 28 Sep, 2015  
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लालटेन

Posted On: 20 Sep, 2015  
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चन्दन तूलिका

Posted On: 20 Sep, 2015  
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इस्तुति जुगल रूप की

Posted On: 20 Sep, 2015  
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Posted On: 15 Sep, 2015  
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हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी का आयोजन

Posted On: 14 Sep, 2015  
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सोडली

Posted On: 16 Aug, 2015  
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सोडली परिचय (हिन्दी काव्य सृजन की एक नई विधा)

Posted On: 11 Aug, 2015  
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क्या यही है अभिव्यक्ति की आजादी?

Posted On: 31 Jul, 2015  
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Others social issues लोकल टिकेट में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Maharathi Maharathi

के द्वारा: Dr. D K Pandey Dr. D K Pandey

माननीय शकुन्तला मिश्राजी जी सादर प्रणाम। प्रारम्भ में मुझे भी ऐसा ही लगता था कि कुण्डली लिखना महारथी के बस की बात नहीं है। क्योंकि पहले दोहा लिखो फिर रौला लिखो। आखिरी और पहले शब्द को मिलाओ। फिर मात्र छह पंक्तियों में अपनी पूरी बात रखो। ..... कठिन है। नहीं नहीं मैं घनाक्षरी लिख लूंगा। लेकिन धन्य हैं मेरे गुरुदेव श्री मोही जी। मुझे कुण्डली लेखन सिखाने में उन्होंने बहुत मेहनत की। एक ममता भरी माँ की भांति वे कई बार नाराज भी हुए और कई बार प्रशंसा भी की। उनका कहना था कि कठिन तो वो भी था जो रोटी का पहला गस्सा तुमने खाया था, और उसकी तुम्हें याद भी नहीं है। अभ्यास करते करते गस्सा खाना भी आ गया और कुण्डली लिखना भी। यहाँ यह लिखना आवश्यक है कि मैं आज भी कुण्डली लेखन सीख रहा हूँ। हालांकि आज यह मेरी मुख्य काव्य विधा है।। आपने मेरी कुण्डली की प्रशंसा कर मेरे गुरुदेव का मान बढाया है मैं आपका ऋणी हूँ।। साभार महारथी।।

के द्वारा: Maharathi Maharathi

के द्वारा: meenakshi meenakshi

के द्वारा: maharathi maharathi




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